चक्रवात के नाम कैसे रखे जाते हैं? इतिहास, 13 देशों की सूची और अगला नाम

📢 ताजा अपडेट – 31 अक्टूबर 2026

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जब भी बंगाल की खाड़ी या अरब सागर में कोई शक्तिशाली चक्रवात बनता है, तो समाचारों में उसका एक विशेष नाम सुनाई देता है। कभी बिपरजॉय, कभी ताउते, कभी दाना और कभी अर्नब। लेकिन क्या आपने सोचा है कि इन तूफानों के नाम कौन रखता है? क्या नाम तूफान आने वाले देश के आधार पर तय होता है? और क्या कोई देश अपनी पसंद से किसी भी चक्रवात का नाम रख सकता है?

दरअसल, चक्रवातों के नाम रखने के पीछे एक अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था काम करती है। इस लेख में जानिए चक्रवात के नामकरण का इतिहास, नाम चुनने के नियम, इसमें शामिल 13 देशों की सूची, भारत की भूमिका और आधिकारिक सूची में अगला नाम कौन-सा है।

इस लेख की मुख्य बातें
  • उत्तर हिंद महासागर में नामकरण की शुरुआत सितंबर 2004 में हुई।
  • वर्तमान नामकरण सूची अप्रैल 2020 में स्वीकृत की गई थी।
  • इस सूची में 13 देशों के कुल 169 नाम हैं।
  • चक्रवात का नाम उसकी ताकत या प्रभावित होने वाले देश के आधार पर नहीं चुना जाता।
  • अर्नब के बाद आधिकारिक क्रम में भारत का प्रस्तावित नाम मुरासु (Murasu) है।

1. चक्रवात क्या होता है?

चक्रवात एक ऐसी मौसम प्रणाली है जिसमें कम वायुदाब वाले क्षेत्र के चारों ओर हवाएं घूमती हैं। समुद्र के ऊपर अनुकूल परिस्थितियां मिलने पर यह प्रणाली शक्तिशाली हो सकती है और तेज हवाओं, भारी वर्षा, समुद्र में ऊंची लहरों तथा तटीय इलाकों में बाढ़ जैसी स्थितियां पैदा कर सकती है।

भारत के लिए बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में बनने वाले उष्णकटिबंधीय चक्रवात विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। हालांकि, हर कम दबाव वाला क्षेत्र चक्रवात नहीं बनता। इसके लिए हवा की गति और अन्य मौसम संबंधी परिस्थितियों का निर्धारित मानकों पर पहुंचना आवश्यक है।

2. चक्रवातों के नाम रखने का इतिहास

पहले मौसम विभाग और वैज्ञानिक चक्रवातों की पहचान उनके बनने के स्थान, तारीख या अन्य तकनीकी विवरणों से करते थे। लेकिन जब एक ही क्षेत्र में कई तूफान आते थे, तो उनके बारे में जानकारी देना और चेतावनियों को समझना मुश्किल हो सकता था।

इसी समस्या को दूर करने के लिए मौसम वैज्ञानिकों ने चक्रवातों को अलग-अलग नाम देने की व्यवस्था विकसित की। नाम होने से किसी विशेष तूफान की पहचान करना, उसके बारे में चेतावनी जारी करना और आम लोगों तक सूचना पहुंचाना आसान हो जाता है।

उत्तर हिंद महासागर में नामकरण की समयरेखा:

  • 2000: WMO/ESCAP के उष्णकटिबंधीय चक्रवात पैनल की बैठक में बंगाल की खाड़ी और अरब सागर के चक्रवातों के नामकरण पर सहमति बनी।
  • सितंबर 2004: इस क्षेत्र में चक्रवातों के नामकरण की औपचारिक शुरुआत हुई। शुरुआती व्यवस्था में आठ देश शामिल थे।
  • 2018–2019: पांच नए देशों को शामिल करने और नई नाम सूची तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी।
  • अप्रैल 2020: 13 देशों की भागीदारी वाली नई सूची को स्वीकृति मिली। इसमें कुल 169 नाम हैं।

यह जानकारी भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की प्रेस विज्ञप्ति और विश्व मौसम विज्ञान संगठन के आधिकारिक विवरण पर आधारित है।

आधिकारिक स्रोत: भारत सरकार की 28 अप्रैल 2020 की प्रेस विज्ञप्ति | WMO की आधिकारिक चक्रवात नाम सूची

3. चक्रवातों के नाम कौन रखता है?

दुनिया के अलग-अलग समुद्री क्षेत्रों में चक्रवातों के नामकरण की जिम्मेदारी संबंधित क्षेत्रीय मौसम केंद्रों और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के अंतर्गत काम करने वाली संस्थाओं की होती है।

भारत, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में बनने वाले चक्रवातों के लिए नई दिल्ली स्थित भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) क्षेत्रीय विशेषीकृत मौसम केंद्र (RSMC) के रूप में नाम निर्धारित करता है। यह काम WMO/ESCAP के उष्णकटिबंधीय चक्रवात पैनल द्वारा स्वीकृत सूची के अनुसार किया जाता है।

इसका अर्थ है कि यदि कोई चक्रवात भारत के बजाय बांग्लादेश, ओमान या पाकिस्तान की ओर बढ़ रहा हो, तब भी उसका नाम केवल उस देश के आधार पर नहीं रखा जाता जहां उसके पहुंचने की आशंका है। नाम पहले से तय क्रम से लिया जाता है।

IMD की आधिकारिक वेबसाइट पर मौसम संबंधी जानकारी देखें

4. चक्रवात का नाम रखने के नियम क्या हैं?

चक्रवात का नाम चुनने के लिए निर्धारित नियमों का पालन किया जाता है। भारत सरकार की वर्ष 2020 की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, नामों को लेकर प्रमुख नियम ये हैं:

  1. नाम छोटा होना चाहिए: नाम को आसानी से पढ़ा, बोला और याद रखा जा सके।
  2. उच्चारण आसान हो: नाम ऐसा हो जिसे अलग-अलग देशों के लोग अपेक्षाकृत आसानी से बोल सकें।
  3. नाम की अधिकतम लंबाई: इस क्षेत्र की सूची के लिए नाम अधिकतम आठ अक्षरों का होना चाहिए।
  4. किसी की भावनाएं आहत न हों: नाम अपमानजनक नहीं होना चाहिए और उसे धार्मिक, सांस्कृतिक या राजनीतिक विवाद से बचना चाहिए।
  5. नाम पहले से इस्तेमाल न हुआ हो: उत्तर हिंद महासागर की सूची में इस्तेमाल हो चुका नाम दोबारा इस्तेमाल नहीं किया जाता।
  6. नाम पहले से स्वीकृत सूची से लिया जाता है: तूफान बनने के बाद मनमाने ढंग से कोई नया नाम नहीं चुना जाता।

इसलिए यह धारणा सही नहीं है कि भारत में आने वाले तूफान का नाम भारत ही रखेगा या जिस देश को सबसे ज्यादा नुकसान होने की आशंका हो, वही नाम तय करेगा।

5. चक्रवातों के नाम रखने वाले 13 देशों की सूची

उत्तर हिंद महासागर क्षेत्र के लिए स्वीकृत नाम सूची में 13 देश शामिल हैं। प्रत्येक देश ने अपने हिस्से के नाम प्रस्तावित किए हैं। ये नाम एक निर्धारित क्रम में इस्तेमाल होते हैं।

क्रमांक देश का नाम
1 बांग्लादेश
2 भारत
3 ईरान
4 मालदीव
5 म्यांमार
6 ओमान
7 पाकिस्तान
8 कतर
9 सऊदी अरब
10 श्रीलंका
11 थाईलैंड
12 संयुक्त अरब अमीरात (UAE)
13 यमन

ध्यान दें: ये देश उत्तर हिंद महासागर के क्षेत्रीय नामकरण पैनल के सदस्य हैं। दुनिया के अन्य समुद्री क्षेत्रों में चक्रवातों के नामों की अलग सूचियां और प्रक्रियाएं लागू होती हैं।

6. भारत ने चक्रवातों के कौन-कौन से नाम दिए हैं?

भारत ने आधिकारिक सूची में कई नाम प्रस्तावित किए हैं। इनमें से कुछ नाम अलग-अलग समय पर चक्रवातों के लिए इस्तेमाल हो चुके हैं। उदाहरण के तौर पर:

  • गति (Gati)
  • तेज (Tej)
  • मुरासु (Murasu)
  • आग (Aag)
  • व्योम (Vyom)
  • झर (Jhar)
  • प्रबाहो (Probaho)
  • नीर (Neer)
  • प्रभंजन (Prabhanjan)
  • घूर्णि (Ghurni)
  • अंबुद (Ambud)
  • जलधि (Jaladhi)
  • वेगा (Vega)

सूची में नाम का होना यह नहीं बताता कि तूफान कितना शक्तिशाली होगा। किसी नाम के इस्तेमाल का अर्थ केवल इतना है कि निर्धारित क्रम में उस नाम की बारी आई है।

7. चक्रवात अर्नब के बाद अगला नाम क्या है?

WMO की आधिकारिक उत्तर हिंद महासागर नाम सूची में अर्नब (Arnab) बांग्लादेश द्वारा प्रस्तावित नाम है। आधिकारिक क्रम में इसके बाद भारत का प्रस्तावित नाम मुरासु (Murasu) आता है।

आधिकारिक सूची में अगला नाम

मुरासु (Murasu)

नाम प्रस्तावित करने वाला देश: भारत

इसके बाद सूची के क्रम में आने वाले अगले नाम इस प्रकार हैं:

क्रम नाम प्रस्तावित करने वाला देश
1 मुरासु (Murasu) भारत
2 अकवान (Akvan) ईरान
3 कानी (Kaani) मालदीव
4 ङामन (Ngamann) म्यांमार
5 सेल (Sail) ओमान
6 सहाब (Sahab) पाकिस्तान
7 लुलु (Lulu) कतर
8 गजीर (Ghazeer) सऊदी अरब
9 गिगुम (Gigum) श्रीलंका
10 थियानियट (Thianyot) थाईलैंड

महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण: यह तालिका आधिकारिक नाम सूची का क्रम बताती है। इसका मतलब यह नहीं है कि मुरासु या उसके बाद का कोई नाम किसी निश्चित तारीख को अवश्य इस्तेमाल होगा। नाम तभी इस्तेमाल होता है जब संबंधित क्षेत्र में नया चक्रवात निर्धारित मानक तक पहुंचता है। वास्तविक स्थिति के लिए IMD का ताजा बुलेटिन देखें।

आधिकारिक सूची: WMO पर सभी नाम देखें

8. चक्रवात का नाम कब रखा जाता है?

उत्तर हिंद महासागर में चक्रवात को नाम देने के लिए अधिकतम स्थायी हवा की गति कम से कम 34 नॉट यानी लगभग 62–63 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंचनी चाहिए। केवल सामान्य निम्न दबाव बनने से किसी मौसम प्रणाली को आधिकारिक चक्रवात का नाम नहीं दिया जाता।

मौसम विभाग हवा की गति, वायुदाब, प्रणाली की संरचना और अन्य मौसम संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण करता है। आवश्यक मानक पूरा होने पर निर्धारित क्रम में अगला उपलब्ध नाम इस्तेमाल किया जाता है।

9. क्या चक्रवात का नाम उसकी ताकत बताता है?

नहीं। नाम का तूफान की विनाशकारी क्षमता से सीधा संबंध नहीं होता। किसी चक्रवात का नाम छोटा, सामान्य या सुनने में हल्का लग सकता है, लेकिन इससे उसकी ताकत का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता।

चक्रवात कितना खतरनाक है, यह जानने के लिए उसकी अधिकतम स्थायी हवा की गति, संभावित मार्ग, वर्षा, तूफानी ज्वार, तटीय प्रभाव और मौसम विभाग की चेतावनी देखनी चाहिए। एक ही नामकरण सूची में आने वाले दो तूफानों की तीव्रता और नुकसान में बड़ा अंतर हो सकता है।

10. क्या एक ही चक्रवात का नाम दोबारा रखा जाता है?

उत्तर हिंद महासागर की वर्तमान सूची में इस्तेमाल किए गए नाम को दोबारा इस्तेमाल नहीं किया जाता। सूची में नाम पहले से निर्धारित होते हैं और उन्हें क्रमवार इस्तेमाल किया जाता है।

यह नियम नामों को स्पष्ट पहचान देने और चेतावनी संबंधी भ्रम कम करने में मदद करता है। अन्य महासागरीय क्षेत्रों में नामों को दोहराने या गंभीर नुकसान पहुंचाने वाले तूफानों के नाम हटाने के अलग नियम हो सकते हैं। इसलिए दुनिया के सभी क्षेत्रों के लिए एक जैसा नियम मान लेना सही नहीं होगा।

11. चक्रवात आने पर आम लोगों को क्या करना चाहिए?

  • IMD और स्थानीय प्रशासन की आधिकारिक चेतावनियों पर ध्यान दें।
  • तटीय क्षेत्र में रहने वाले लोग प्रशासन के निर्देश पर सुरक्षित स्थान या राहत शिविर में जाएं।
  • बिजली के खंभों, टूटे तारों, कमजोर पेड़ों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहें।
  • मोबाइल चार्ज रखें और जरूरी दवाइयां, पीने का पानी, टॉर्च तथा जरूरी दस्तावेज तैयार रखें।
  • सोशल मीडिया पर वायरल अपुष्ट खबरों के बजाय मौसम विभाग और प्रशासन की सूचना पर भरोसा करें।

चक्रवात का नाम जानना उपयोगी है, लेकिन उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है मौसम विभाग की चेतावनी को समय पर समझना और उसके अनुसार सुरक्षित कदम उठाना।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

भारत में चक्रवातों के नाम कौन रखता है?

बंगाल की खाड़ी और अरब सागर के चक्रवातों का नाम नई दिल्ली स्थित भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) निर्धारित सूची के अनुसार रखता है।

चक्रवातों के नाम रखने की शुरुआत कब हुई?

उत्तर हिंद महासागर क्षेत्र में आधिकारिक नामकरण सितंबर 2004 में शुरू हुआ था।

चक्रवातों के नाम कौन-कौन से 13 देश देते हैं?

बांग्लादेश, भारत, ईरान, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, श्रीलंका, थाईलैंड, संयुक्त अरब अमीरात और यमन।

चक्रवात अर्नब के बाद अगला नाम क्या है?

आधिकारिक नाम सूची के क्रम में अर्नब के बाद मुरासु (Murasu) है, जिसे भारत ने प्रस्तावित किया है। इसका वास्तविक इस्तेमाल अगले पात्र चक्रवात के बनने पर निर्भर करता है।

क्या चक्रवात का नाम उसके खतरनाक होने के आधार पर रखा जाता है?

नहीं। नाम पहले से स्वीकृत सूची से तय क्रम में लिया जाता है। तूफान की गंभीरता का आकलन हवा की गति, संभावित मार्ग और मौसम संबंधी चेतावनियों से किया जाता है।

निष्कर्ष

चक्रवातों के नामकरण की व्यवस्था केवल नाम रखने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि मौसम संबंधी चेतावनियों को स्पष्ट और प्रभावी बनाने का एक महत्वपूर्ण तरीका है। उत्तर हिंद महासागर के लिए 13 देशों ने कुल 169 नामों की सूची तैयार की है, जिसे निर्धारित क्रम में इस्तेमाल किया जाता है। भारत मौसम विज्ञान विभाग इस क्षेत्र में चक्रवातों के नाम निर्धारित करने की जिम्मेदारी निभाता है।

यदि आप चक्रवात की ताजा स्थिति, संभावित मार्ग या चेतावनी जानना चाहते हैं, तो नामों की सूची के साथ-साथ IMD के आधिकारिक बुलेटिन को भी जरूर देखें।

जानकारी के आधिकारिक स्रोत

लेख प्रकाशित करने से पहले चक्रवात की वर्तमान स्थिति और नाम के इस्तेमाल की पुष्टि आधिकारिक IMD बुलेटिन से करें।

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