चक्रवात अर्नब 2026: भारत के किन राज्यों में सबसे ज्यादा असर?

ताजा अपडेट | 31 अक्टूबर 2026

बंगाल की खाड़ी से उठा चक्रवात अर्नब 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश-यानम तट से टकराया। इसके बाद तूफान कमजोर होकर अंदरूनी क्षेत्रों की ओर बढ़ा। आंध्र प्रदेश और ओडिशा में इसका सीधा असर देखने को मिला, जबकि तेलंगाना, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में इसके कमजोर अवशेषों से बारिश और खराब मौसम का प्रभाव रहा।

चक्रवात अर्नब 2026: भारत में किन राज्यों पर पड़ा सबसे ज्यादा असर?

अक्टूबर 2026 के अंतिम सप्ताह में बंगाल की खाड़ी में विकसित हुआ चक्रवात अर्नब तेजी से मजबूत होकर बहुत गंभीर चक्रवाती तूफान बना। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के पूर्वानुमान के अनुसार यह 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश और यानम के तट से गुजरा। इसके दौरान तेज हवाएं, भारी बारिश, समुद्र में ऊंची लहरें और निचले तटीय क्षेत्रों में जलभराव जैसी स्थितियां बनीं।

तूफान का प्रभाव केवल समुद्र तट तक सीमित नहीं रहा। इसके कमजोर होने के बाद मौसम प्रणाली आगे बढ़कर दक्षिणी ओडिशा और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों तक पहुंची। कई राज्यों में भारी बारिश और आंधी-तूफान का अलर्ट जारी किया गया।

महत्वपूर्ण: हर उस राज्य को चक्रवात से सीधे नुकसान वाला राज्य नहीं कहा जा सकता जहां बारिश हुई। इसलिए इस रिपोर्ट में प्रत्यक्ष चक्रवाती प्रभाव और बाद की बारिश के प्रभाव को अलग-अलग बताया गया है।

1. आंध्र प्रदेश: चक्रवात का सीधा और गंभीर असर

आंध्र प्रदेश चक्रवात अर्नब से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में रहा। काकीनाडा, कोनसीमा, पूर्वी गोदावरी और आसपास के तटीय जिलों में तेज हवाओं और भारी बारिश का असर देखा गया। कई जगह पेड़ और बिजली के खंभे गिरने से सड़क तथा बिजली व्यवस्था प्रभावित हुई।

  • काकीनाडा और आसपास के तटीय इलाकों में तेज हवाओं और बारिश से नुकसान हुआ।
  • विशाखापत्तनम क्षेत्र में भारी बारिश के कारण निचले इलाकों में पानी भरने की खबरें आईं।
  • पूर्वी गोदावरी में पेड़ गिरने से जान जाने की घटना रिपोर्ट हुई।
  • केले और नारियल सहित कई फसलों तथा कृषि भूमि को नुकसान पहुंचने की खबरें आईं।
  • सड़क, बिजली और अन्य आवश्यक सेवाओं को बहाल करने के लिए प्रशासन ने राहत एवं मरम्मत कार्य चलाए।

द इंडियन एक्सप्रेस की 29 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, आंध्र प्रदेश में 84,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया था। राज्य में राहत शिविरों की व्यवस्था की गई और बिजली, पेयजल तथा स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारु रखने के लिए टीमें तैनात की गईं।

2. ओडिशा: दक्षिणी जिलों में भारी बारिश और बाढ़ का खतरा

आंध्र प्रदेश के बाद ओडिशा के दक्षिणी जिलों में चक्रवात का प्रभाव गंभीर रहा। मलकानगिरी, कोरापुट, रायगढ़ा, गजपति, गंजाम और नबरंगपुर जैसे जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी दी गई थी। पहाड़ी और निचले इलाकों में जलभराव तथा भूस्खलन का खतरा बना रहा।

  • मलकानगिरी और कोरापुट में भारी बारिश को लेकर रेड अलर्ट जारी किया गया था।
  • गंजाम, गजपति और रायगढ़ा में तेज बारिश और तेज हवाओं का असर रहा।
  • निचले और भूस्खलन की आशंका वाले इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।
  • पेड़ गिरने और सड़क आवागमन प्रभावित होने की खबरें सामने आईं।
  • प्रशासन ने राहत शिविर, भोजन, पेयजल और बचाव दलों की व्यवस्था की।

द इंडियन एक्सप्रेस की 29 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, ओडिशा में 30,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया था। राज्य प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में बचाव दलों को तैनात किया था।

3. तेलंगाना: भारी बारिश और मौसम की चेतावनी

तेलंगाना में चक्रवात का सीधा तटीय लैंडफॉल नहीं हुआ, लेकिन इसकी मौसम प्रणाली के प्रभाव से राज्य के कुछ हिस्सों में बारिश और खराब मौसम की आशंका जताई गई। विशेष रूप से पूर्वी और दक्षिणी क्षेत्रों में मौसम पर निगरानी रखी गई।

केंद्र सरकार की 26 अक्टूबर की तैयारी संबंधी बैठक में तेलंगाना को संभावित प्रभाव वाले राज्यों में शामिल किया गया था। हालांकि राज्य में व्यापक चक्रवाती तबाही या बड़े नुकसान का कोई पुष्ट आंकड़ा इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है।

4. छत्तीसगढ़: कमजोर तूफानी प्रणाली पहुंचने से बारिश

चक्रवात अर्नब समुद्र से जमीन की ओर बढ़ने के बाद कमजोर होता गया। 29 अक्टूबर को IMD ने इसके अवशेष को दक्षिण छत्तीसगढ़ और उससे लगे दक्षिणी ओडिशा के ऊपर डिप्रेशन के रूप में दर्ज किया था।

दक्षिण और मध्य छत्तीसगढ़ में बारिश तथा खराब मौसम का असर देखने को मिला। कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश और गरज-चमक की चेतावनी दी गई। हालांकि पूरे राज्य में एक समान नुकसान होने का दावा करना सही नहीं होगा।

5. झारखंड: बारिश और गरज-चमक का संभावित असर

चक्रवात के कमजोर होने के बाद पूर्वी और मध्य भारत के मौसम में बदलाव देखा गया। झारखंड के कुछ हिस्सों में बारिश, गरज-चमक और तेज हवा की आशंका जताई गई थी। यह प्रभाव मुख्य रूप से कमजोर हो चुकी मौसम प्रणाली से जुड़ा था।

झारखंड में चक्रवात के कारण बड़े स्तर पर प्रत्यक्ष नुकसान या जनहानि का कोई पुष्ट आंकड़ा उपलब्ध रिपोर्टों में स्पष्ट नहीं है। इसलिए राज्य को भारी तबाही वाला क्षेत्र बताना उचित नहीं होगा।

6. बिहार: पूर्वी हिस्सों में मौसम पर असर

बिहार को भी चक्रवात के आगे बढ़ने के दौरान संभावित बारिश वाले क्षेत्रों में शामिल किया गया था। विशेषकर पूर्वी बिहार में बारिश और गरज-चमक की संभावना को लेकर मौसम विभाग की चेतावनी महत्वपूर्ण रही।

बिहार में चक्रवात के सीधे टकराने की स्थिति नहीं बनी। यहां संभावित असर मुख्य रूप से बारिश और मौसम में बदलाव के रूप में देखा जाना चाहिए। किसी बड़े चक्रवाती नुकसान की पुष्टि के बिना नुकसान का आंकड़ा प्रकाशित नहीं करना चाहिए।

7. उत्तर प्रदेश: पूर्वी क्षेत्रों में बारिश की संभावना

उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्सों को भी केंद्र सरकार की 26 अक्टूबर की समीक्षा बैठक में संभावित भारी बारिश वाले क्षेत्रों में शामिल किया गया था। चक्रवात के कमजोर अवशेषों के आगे बढ़ने के साथ पूर्वी उत्तर प्रदेश में मौसम बदलने की संभावना जताई गई थी।

उत्तर प्रदेश में चक्रवात का सीधा लैंडफॉल नहीं हुआ। इसलिए राज्य में हुई किसी भी बारिश को सीधे चक्रवात से हुई तबाही बताने से पहले IMD की जिला-वार रिपोर्ट देखना जरूरी है।

केंद्र सरकार ने किन राज्यों को पहले से किया था अलर्ट?

प्रधानमंत्री स्तर की आपदा तैयारी व्यवस्था के अंतर्गत राष्ट्रीय संकट प्रबंधन समिति (NCMC) की बैठक 26 अक्टूबर 2026 को हुई थी। PIB की आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और पुडुचेरी के अधिकारियों ने तैयारियों की जानकारी दी थी। पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार में भी भारी बारिश की संभावना को देखते हुए सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए थे।

इस दौरान NDRF और SDRF की टीमों को तैयार रखा गया। सेना, नौसेना, वायुसेना और भारतीय तटरक्षक बल की राहत एवं बचाव व्यवस्थाओं को भी अलर्ट पर रखा गया था। मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई थी।

चक्रवात अर्नब से कितने लोगों की मौत हुई और कितना नुकसान हुआ?

चक्रवात के तुरंत बाद जारी रिपोर्टों में मृतकों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए। 28 अक्टूबर की द न्यू इंडियन एक्सप्रेस रिपोर्ट में आंध्र प्रदेश में तीन मौतों और 31 मकानों को नुकसान पहुंचने की जानकारी दी गई थी। वहीं 29 अक्टूबर की द इंडियन एक्सप्रेस रिपोर्ट में कम से कम सात मौतों की खबर का उल्लेख था, लेकिन साथ ही यह भी बताया गया कि राज्य सरकार ने उस समय आधिकारिक संख्या जारी नहीं की थी।

इसलिए 31 अक्टूबर तक उपलब्ध शुरुआती रिपोर्टों के आधार पर किसी एक संख्या को अंतिम सरकारी आंकड़ा बताना उचित नहीं है। नुकसान का अंतिम आकलन राज्य सरकार और संबंधित आपदा प्रबंधन विभाग की पुष्टि के बाद ही किया जाना चाहिए।

AP की रिपोर्ट के अनुसार, आंध्र प्रदेश में घरों, सड़कों, बिजली व्यवस्था और लगभग 79,000 एकड़ कृषि भूमि को नुकसान पहुंचा। केले और नारियल की खेती प्रभावित होने की भी जानकारी दी गई। ये शुरुआती रिपोर्ट के आंकड़े हैं, अंतिम सरकारी सर्वेक्षण नहीं।

क्या भारत के अलावा दूसरे देशों में भी चक्रवात अर्नब का असर हुआ?

चक्रवात अर्नब बंगाल की खाड़ी में विकसित हुआ और इसका मुख्य लैंडफॉल भारत के आंध्र प्रदेश-यानम तट पर हुआ। उपलब्ध रिपोर्टों में नेपाल में भारी बारिश और यात्रा संबंधी सावधानियों का उल्लेख है, लेकिन नेपाल में इस चक्रवात से सीधे हुए बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं है।

इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि चक्रवात ने कई देशों में सीधे तबाही मचाई। इसका प्रमुख प्रत्यक्ष असर भारत के पूर्वी तट पर रहा।

31 अक्टूबर तक चक्रवात अर्नब की स्थिति क्या है?

IMD की 29 अक्टूबर की प्रेस विज्ञप्ति में चक्रवात अर्नब के अवशेष को दक्षिण छत्तीसगढ़ और उससे लगे दक्षिण ओडिशा के ऊपर डिप्रेशन बताया गया था। इसका अर्थ है कि यह समुद्र पर मौजूद बहुत गंभीर चक्रवाती तूफान वाली स्थिति में नहीं रहा। इसके कमजोर होने के बाद भी कुछ क्षेत्रों में बारिश और गरज-चमक जारी रह सकती है।

30 अक्टूबर को दक्षिण अंडमान सागर के पास एक अलग कम दबाव का क्षेत्र बनने की रिपोर्ट भी सामने आई। IMD के अनुसार इसके आगे डिप्रेशन में बदलने की संभावना पर नजर रखी जा रही थी। इसे चक्रवात अर्नब का दोबारा मजबूत होना नहीं समझना चाहिए। यह एक अलग मौसम प्रणाली है।

चक्रवात के बाद लोगों को क्या सावधानियां रखनी चाहिए?

  • मौसम विभाग और जिला प्रशासन की चेतावनियों पर ध्यान दें।
  • तेज बारिश के दौरान नदी, नाले और जलभराव वाले रास्तों से दूर रहें।
  • गिरे हुए बिजली के तारों और खंभों को न छुएं।
  • समुद्र में मछली पकड़ने जाने से पहले स्थानीय प्रशासन की अनुमति और मौसम चेतावनी देखें।
  • बाढ़ या भूस्खलन की आशंका वाले क्षेत्रों में प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।
  • आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन और आपदा सहायता सेवाओं से संपर्क करें।

निष्कर्ष

चक्रवात अर्नब 2026 का सबसे गंभीर प्रत्यक्ष असर आंध्र प्रदेश और ओडिशा में देखने को मिला। आंध्र प्रदेश के तटीय जिलों में तेज हवाओं, बारिश, मकानों, बिजली व्यवस्था और फसलों को नुकसान पहुंचा। ओडिशा के दक्षिणी जिलों में भारी बारिश, जलभराव और भूस्खलन का खतरा बना रहा। इसके कमजोर होने के बाद तेलंगाना, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी मौसम प्रभावित हुआ।

चक्रवात कमजोर हो जाने के बाद भी बारिश, जलभराव और क्षतिग्रस्त बिजली-सड़क व्यवस्था से जुड़ी परेशानियां बनी रह सकती हैं। इसलिए लोगों को स्थानीय प्रशासन और IMD के ताजा निर्देशों का पालन करना चाहिए।

महत्वपूर्ण आधिकारिक स्रोत और आगे की जानकारी

अस्वीकरण: यह रिपोर्ट 31 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध मौसम विभाग, सरकारी विज्ञप्तियों और समाचार रिपोर्टों पर आधारित है। राहत, जनहानि और संपत्ति के नुकसान के आंकड़े शुरुआती हो सकते हैं तथा सरकारी आकलन के बाद बदल सकते हैं।

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