विशेष जागरूकता लेख | अपडेट: 1 नवंबर 2026
बच्चों की सुरक्षा केवल माता-पिता की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि स्कूल, शिक्षक, प्रशासन और समाज की भी बराबर जिम्मेदारी है। हाल ही में हरियाणा के पंचकूला में स्कूल परिसर के अंदर दो छोटे विद्यार्थियों से जुड़ी एक गंभीर घटना सामने आई है। इस घटना ने स्कूलों में बच्चों की निगरानी, खाली कक्षों की सुरक्षा, शिक्षकों की जिम्मेदारी और बच्चों के मोबाइल-इंटरनेट उपयोग को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए हैं।
इस घटना की जाँच जारी है। कुछ समाचार रिपोर्टों में एक बच्चे के मोबाइल गेम खेलने और कथित गेमिंग गतिविधियों की भी चर्चा हुई है, लेकिन अभी यह प्रमाणित नहीं है कि किसी विशेष गेम के कारण ही घटना हुई। इसलिए किसी गेम, बच्चे या परिवार को दोषी ठहराने के बजाय इस विषय को बच्चों की सुरक्षा और डिजिटल जागरूकता के नजरिए से समझना जरूरी है।
- पंचकूला की घटना से क्या सवाल सामने आए?
- स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा के लिए कौन-सी व्यवस्थाएँ जरूरी हैं?
- मोबाइल गेम और इंटरनेट का बच्चों पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?
- माता-पिता बच्चों के स्क्रीन टाइम और ऑनलाइन गतिविधियों को कैसे सुरक्षित रखें?
- शिक्षक, स्कूल प्रबंधन और अभिभावक मिलकर क्या कदम उठा सकते हैं?
- बच्चों की सुरक्षा से जुड़े सरकारी दिशानिर्देश और शिकायत के विकल्प।
1. पंचकूला स्कूल की घटना: क्या जानकारी सामने आई?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार 28 अक्टूबर 2026 को हरियाणा के पंचकूला के सेक्टर-20 स्थित एक स्कूल में दो छोटे विद्यार्थियों से जुड़ी गंभीर घटना हुई। रिपोर्टों में बताया गया कि एक छह वर्षीय छात्रा को उसी स्कूल के आठ वर्षीय विद्यार्थी ने कथित रूप से चोट पहुँचाई। घायल बच्ची को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। 31 अक्टूबर और 1 नवंबर की प्रकाशित खबरों के अनुसार बच्ची की स्थिति स्थिर बताई गई और वह खतरे से बाहर थी।
इस मामले में पुलिस ने स्कूल प्रबंधन से जुड़े लोगों के खिलाफ कथित लापरवाही को लेकर मामला दर्ज किया। पुलिस ने स्कूलों की सुरक्षा और विद्यार्थियों की निगरानी से जुड़े सवालों पर भी चिंता जताई तथा पंचकूला के स्कूलों के लिए सुरक्षा संबंधी SOP जारी करने की बात कही। हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने भी मामले में शिक्षा विभाग से तथ्यात्मक रिपोर्ट माँगी।
कुछ रिपोर्टों में मोबाइल गेमिंग और बच्चे के ऑनलाइन व्यवहार की जाँच का उल्लेख है। लेकिन जाँच पूरी होने से पहले यह कहना सही नहीं होगा कि घटना किसी खास मोबाइल गेम की वजह से हुई। दोनों बच्चे नाबालिग हैं, इसलिए उनकी पहचान और निजी जानकारी सार्वजनिक करना उचित नहीं है।
समाचार स्रोत:
- NDTV – पंचकूला स्कूल मामले और पुलिस की प्रारंभिक जानकारी
- The Tribune – 1 नवंबर की मामले से जुड़ी रिपोर्ट
2. स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा क्यों सबसे जरूरी है?
माता-पिता अपने बच्चों को पढ़ाई और सुरक्षित वातावरण की उम्मीद से स्कूल भेजते हैं। स्कूल में बच्चे केवल कक्षा में ही नहीं रहते, बल्कि गलियारों, सीढ़ियों, खेल के मैदान, पुस्तकालय, शौचालय के आसपास और अन्य कमरों में भी आते-जाते हैं। इसलिए सुरक्षा की व्यवस्था पूरे स्कूल परिसर में होनी चाहिए।
बच्चों की सुरक्षा के लिए स्कूलों को निम्नलिखित व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान देना चाहिए:
कक्षा और खाली कमरों की नियमित निगरानी
- जिन कमरों में कक्षाएँ नहीं चल रही हैं, उन्हें अनावश्यक रूप से खुला न छोड़ा जाए।
- सीढ़ियों, गलियारों और कम आवाजाही वाले स्थानों पर नियमित निगरानी हो।
- बच्चे किसी दूसरे कमरे या मंजिल पर जाएँ तो स्कूल की निर्धारित व्यवस्था के अनुसार उनकी जानकारी रहे।
- स्कूल के समय में बच्चों को लंबे समय तक बिना निगरानी के अकेला न छोड़ा जाए।
शिक्षकों की जिम्मेदारी
- शिक्षक बच्चों की उपस्थिति और कक्षा में उनकी गतिविधियों पर ध्यान दें।
- बच्चों के बीच विवाद, डर, धमकी या लगातार परेशान करने की शिकायत को नजरअंदाज न करें।
- किसी बच्चे के व्यवहार में अचानक बदलाव दिखाई देने पर संवेदनशीलता से बातचीत करें।
- बच्चों को अपनी परेशानी शिक्षक या स्कूल के जिम्मेदार अधिकारी को बताने के लिए प्रोत्साहित करें।
स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी
- स्कूल में स्पष्ट बाल सुरक्षा नीति और शिकायत दर्ज करने की व्यवस्था हो।
- सभी शिक्षकों और कर्मचारियों को बाल सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारियों की जानकारी दी जाए।
- स्कूल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन संपर्क व्यवस्था की नियमित समीक्षा हो।
- किसी घटना की सूचना मिलने पर तुरंत बच्चों की सुरक्षा, चिकित्सा सहायता और निर्धारित रिपोर्टिंग प्रक्रिया अपनाई जाए।
- बच्चों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार कर्मचारियों की भूमिका स्पष्ट हो।
3. मोबाइल गेम और इंटरनेट बच्चों के व्यवहार को कैसे प्रभावित कर सकते हैं?
आज मोबाइल फोन, इंटरनेट और ऑनलाइन गेम बच्चों के मनोरंजन तथा सीखने का हिस्सा बन गए हैं। कुछ डिजिटल गतिविधियाँ बच्चों को नई जानकारी, रचनात्मकता और तकनीकी कौशल सीखने में मदद कर सकती हैं। लेकिन उम्र के अनुरूप न होने वाली सामग्री, बहुत अधिक स्क्रीन टाइम, अनुचित ऑनलाइन संपर्क और बिना निगरानी के गेमिंग से समस्याएँ पैदा हो सकती हैं।
हर बच्चा किसी गेम या वीडियो को एक जैसा नहीं समझता। किसी विशेष गेम को खेलने मात्र से बच्चा हिंसक हो जाएगा, ऐसा निष्कर्ष निकालना सही नहीं है। बच्चों पर प्रभाव उनकी उम्र, व्यक्तित्व, पारिवारिक वातावरण, ऑनलाइन अनुभव, स्क्रीन टाइम और अन्य परिस्थितियों पर निर्भर कर सकता है।
बिना निगरानी के मोबाइल इस्तेमाल के संभावित जोखिम
- अनुचित सामग्री: बच्चे अनजाने में उम्र के अनुसार अनुपयुक्त वीडियो, तस्वीरें या गेम देख सकते हैं।
- ऑनलाइन अनजान लोगों से संपर्क: गेम चैट और सोशल प्लेटफॉर्म पर अनजान लोग बच्चों से बातचीत करने की कोशिश कर सकते हैं।
- साइबर बुलिंग: ऑनलाइन मजाक, धमकी, अपमान या परेशान करने वाली गतिविधियाँ बच्चों को मानसिक रूप से प्रभावित कर सकती हैं।
- नींद और पढ़ाई प्रभावित होना: देर रात तक मोबाइल इस्तेमाल करने से नींद, पढ़ाई और दैनिक दिनचर्या बिगड़ सकती है।
- अत्यधिक निर्भरता: यदि बच्चा मोबाइल के बिना बेचैन हो, दूसरे कामों में रुचि कम करे या लगातार गेम खेलने की माँग करे तो अभिभावकों को ध्यान देना चाहिए।
इन संकेतों का मतलब यह नहीं है कि बच्चे को कोई बीमारी है। जरूरत पड़ने पर अभिभावक शिक्षक, बाल परामर्शदाता या योग्य मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सहायता ले सकते हैं।
4. माता-पिता बच्चों के मोबाइल और गेमिंग उपयोग के लिए क्या नियम बनाएँ?
बच्चों को मोबाइल से पूरी तरह दूर रखना हर परिस्थिति में व्यावहारिक नहीं है। पढ़ाई, जानकारी और संचार के लिए डिजिटल साधनों की जरूरत पड़ सकती है। जरूरी यह है कि मोबाइल का इस्तेमाल उम्र के अनुरूप, सीमित और सुरक्षित तरीके से हो।
- छोटे बच्चों को बिना निगरानी के स्मार्टफोन या ऑनलाइन गेम न दें।
- बच्चे की उम्र और समझ के अनुसार गेम तथा ऐप चुनें।
- मोबाइल इस्तेमाल का समय परिवार में मिलकर तय करें।
- सोने से पहले मोबाइल और गेमिंग बंद करने की नियमित आदत बनाएँ।
- बच्चों के मोबाइल में उपलब्ध पैरेंटल कंट्रोल और उम्र संबंधी सेटिंग का उपयोग करें।
- गेम में चैट, वॉइस चैट और अनजान लोगों से संपर्क की सुविधा पर ध्यान दें।
- बच्चों को अपना नाम, पता, स्कूल, फोन नंबर, पासवर्ड या परिवार की निजी जानकारी अनजान लोगों को न देने की सीख दें।
- बच्चों को किसी ऑनलाइन खिलाड़ी से अकेले मिलने के लिए कभी न जाने दें।
- मोबाइल के अलावा खेल, किताब, परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताने के अवसर दें।
- बच्चे को डराने या अपमानित करने के बजाय उससे नियमित और खुलकर बातचीत करें।
5. बच्चों में कौन-से बदलाव दिखें तो माता-पिता सावधान हों?
बच्चों के व्यवहार में बदलाव के कई कारण हो सकते हैं। इसलिए किसी एक संकेत को देखकर बच्चे को दोषी ठहराना या तुरंत मोबाइल छीन लेना उचित नहीं है। लेकिन लगातार बदलाव दिखाई देने पर ध्यान देना जरूरी है।
- बच्चा पहले की तुलना में बहुत अधिक समय मोबाइल पर बिताने लगे।
- मोबाइल बंद करने पर लगातार गुस्सा या बेचैनी दिखाए।
- पढ़ाई, खेलकूद या परिवार के साथ समय बिताने में रुचि कम हो जाए।
- नींद का समय बिगड़ने लगे या बच्चा थका हुआ दिखाई दे।
- ऑनलाइन बातचीत या गेम के कारण डर, तनाव या परेशानी महसूस करे।
- बार-बार किसी बच्चे से झगड़ा, धमकी या परेशान करने की शिकायत सामने आए।
ऐसी स्थिति में बच्चे को शांत वातावरण में सुनें। जरूरत पड़ने पर स्कूल काउंसलर या योग्य विशेषज्ञ से सलाह लें। यदि किसी बच्चे की सुरक्षा को तत्काल खतरा हो तो तुरंत जिम्मेदार वयस्क और संबंधित अधिकारियों को सूचित करें।
6. स्कूलों में मोबाइल और इंटरनेट के उपयोग के लिए कौन-से नियम होने चाहिए?
स्कूलों को विद्यार्थियों के लिए स्पष्ट डिजिटल उपयोग नीति बनानी चाहिए। नियम केवल मोबाइल पर प्रतिबंध लगाने तक सीमित न हों, बल्कि बच्चों को सुरक्षित और जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार भी सिखाएँ।
- कक्षा के दौरान निजी मोबाइल का उपयोग स्कूल की नीति के अनुसार नियंत्रित हो।
- ऑनलाइन पढ़ाई के लिए उपयोग किए जाने वाले उपकरणों और वेबसाइटों की निगरानी की व्यवस्था हो।
- बच्चों को साइबर बुलिंग, ऑनलाइन धोखाधड़ी और निजी जानकारी की सुरक्षा के बारे में पढ़ाया जाए।
- किसी विद्यार्थी को ऑनलाइन परेशान किए जाने पर शिकायत करने का सुरक्षित तरीका उपलब्ध हो।
- शिक्षकों और कर्मचारियों को डिजिटल सुरक्षा तथा बाल संरक्षण पर समय-समय पर प्रशिक्षण दिया जाए।
- बच्चों की तस्वीरें और वीडियो साझा करने से पहले आवश्यक अनुमति और गोपनीयता नियमों का पालन किया जाए।
7. भारत सरकार और NCPCR के स्कूल सुरक्षा दिशानिर्देश
भारत में बच्चों की सुरक्षा के लिए शिक्षा मंत्रालय और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने दिशानिर्देश और जागरूकता सामग्री जारी की है। इनका उद्देश्य स्कूलों में सुरक्षित वातावरण, जवाबदेही, बच्चों की शिकायत सुनने की व्यवस्था और ऑनलाइन सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
स्कूल सुरक्षा एवं संरक्षा दिशानिर्देश
शिक्षा मंत्रालय ने 23 अगस्त 2024 को राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को स्कूल सुरक्षा एवं संरक्षा दिशानिर्देशों को लागू करने के संबंध में निर्देश जारी किए थे। इन दिशानिर्देशों में स्कूल प्रबंधन, प्रधानाचार्य, शिक्षकों और शिक्षा प्रशासन की जिम्मेदारियों का उल्लेख है। इनमें बच्चों की सुरक्षा, रोकथाम, शिकायत प्रक्रिया, सहायता और परामर्श जैसे विषय शामिल हैं।
इन दिशानिर्देशों की प्रकृति सलाहकारी है और राज्यों को अपनी जरूरत के अनुसार आवश्यक बदलाव तथा अधिसूचना करने की जानकारी दी गई है। इसलिए किसी विशेष स्कूल पर लागू नियम जानने के लिए संबंधित राज्य के शिक्षा विभाग के आदेश भी देखने चाहिए।
PIB – शिक्षा मंत्रालय की स्कूल सुरक्षा संबंधी जानकारी
NCPCR की बाल सुरक्षा और ऑनलाइन सुरक्षा सामग्री
NCPCR ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा, साइबर बुलिंग रोकने, इंटरनेट के सुरक्षित इस्तेमाल और बच्चों के डिजिटल व्यवहार से संबंधित कई दिशानिर्देश प्रकाशित किए हैं। इनमें स्कूलों, अभिभावकों और शिक्षकों के लिए उपयोगी सामग्री उपलब्ध है।
NCPCR – आधिकारिक दिशानिर्देश और प्रकाशन
8. बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए सरकारी सलाह
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 12 अगस्त 2026 को संसद में दी गई जानकारी में बताया कि बच्चों को डिजिटल तकनीक का लाभ मिले और साथ ही उन्हें ऑनलाइन नुकसान से बचाया जाए, इसके लिए कई कानूनी और जागरूकता संबंधी कदम उठाए गए हैं। सरकार ने ऑनलाइन हानिकारक सामग्री, साइबर बुलिंग, ऑनलाइन दुर्व्यवहार, अत्यधिक स्क्रीन टाइम और डिजिटल निर्भरता जैसे जोखिमों का उल्लेख किया है।
सरकारी जानकारी के अनुसार NCPCR की ‘Being Safe Online’ सामग्री बच्चों, अभिभावकों और शिक्षकों को सुरक्षित इंटरनेट उपयोग के बारे में जागरूक करती है। CBSE और NCERT ने भी डिजिटल सुरक्षा, साइबर जागरूकता और जिम्मेदार ऑनलाइन व्यवहार से संबंधित सामग्री विकसित की है।
PIB – बच्चों को ऑनलाइन नुकसान से बचाने के सरकारी उपाय
9. ऑनलाइन गेम खेलते समय बच्चों को क्या सावधानी रखनी चाहिए?
NCPCR के स्कूल सुरक्षा मैनुअल में ऑनलाइन गेमिंग के दौरान बच्चों की निजी जानकारी और सुरक्षा से संबंधित सावधानियाँ बताई गई हैं। अभिभावक बच्चों को सरल भाषा में ये बातें समझा सकते हैं:
- गेम में किसी अनजान व्यक्ति को अपना पता, फोन नंबर या स्कूल का नाम न बताएँ।
- गेम खेलने के लिए किसी को पासवर्ड या OTP न दें।
- अनजान लिंक या संदिग्ध वेबसाइट से गेम डाउनलोड न करें।
- गेम में परेशान करने वाला संदेश या धमकी मिले तो अभिभावक को बताएँ।
- किसी ऑनलाइन खिलाड़ी से वास्तविक जीवन में अकेले मिलने न जाएँ।
- गेम में पैसे खर्च करने से पहले माता-पिता की अनुमति लें।
- ऑनलाइन बातचीत में अपनी और परिवार की तस्वीरें या निजी जानकारी साझा न करें।
NCPCR – स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा का आधिकारिक मैनुअल (PDF)
10. स्कूल में किसी बच्चे के साथ घटना हो तो शिकायत कहाँ करें?
यदि किसी बच्चे को स्कूल में चोट पहुँचती है, धमकी मिलती है, लगातार परेशान किया जाता है या उसकी सुरक्षा को खतरा होता है, तो अभिभावक को मामले को गंभीरता से लेना चाहिए। स्थिति के अनुसार ये कदम उठाए जा सकते हैं:
- स्कूल प्रशासन: प्रधानाचार्य या निर्धारित बाल सुरक्षा अधिकारी को लिखित शिकायत दें और उसकी प्राप्ति सुरक्षित रखें।
- शिक्षा विभाग: स्कूल द्वारा उचित कार्रवाई न होने पर जिला शिक्षा अधिकारी या संबंधित शिक्षा विभाग से संपर्क करें।
- बाल अधिकार आयोग: बाल अधिकारों से जुड़ी शिकायत के लिए NCPCR या संबंधित राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग से संपर्क किया जा सकता है।
- पुलिस: मारपीट, गंभीर चोट, धमकी या तत्काल सुरक्षा के मामले में पुलिस से संपर्क करें। आपात स्थिति में 112 पर सहायता माँगी जा सकती है।
- बाल सहायता: जरूरत पड़ने पर चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 से संपर्क करें।
आधिकारिक संपर्क:
- राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR)
- चाइल्ड हेल्पलाइन 1098
- राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल
- आपातकालीन सहायता नंबर 112
11. बच्चों की सुरक्षा के लिए स्कूल और परिवार मिलकर क्या कर सकते हैं?
बच्चों की सुरक्षा केवल नियम बनाने से सुनिश्चित नहीं होती। इसके लिए स्कूल और परिवार के बीच नियमित संवाद और जिम्मेदारी का स्पष्ट बँटवारा होना चाहिए।
| किसकी जिम्मेदारी? | जरूरी कदम |
|---|---|
| माता-पिता | बच्चों से बातचीत, मोबाइल उपयोग की निगरानी और सुरक्षित आदतें सिखाना। |
| शिक्षक | बच्चों की गतिविधियों, आपसी व्यवहार और शिकायतों पर ध्यान देना। |
| स्कूल प्रबंधन | सुरक्षा नीति, निगरानी, शिकायत प्रक्रिया और कर्मचारियों का प्रशिक्षण। |
| प्रशासन | दिशानिर्देशों का पालन, निरीक्षण और शिकायतों पर उचित कार्रवाई। |
| समाज | बच्चों के प्रति संवेदनशीलता, जागरूकता और सुरक्षित वातावरण बनाने में सहयोग। |
निष्कर्ष: बच्चों की सुरक्षा सबकी साझा जिम्मेदारी
पंचकूला की घटना हमें याद दिलाती है कि बच्चों की सुरक्षा को स्कूल और घर दोनों जगह गंभीरता से लेना जरूरी है। किसी एक घटना के लिए मोबाइल गेम, इंटरनेट, परिवार या स्कूल को बिना जाँच दोषी ठहराना उचित नहीं है। लेकिन ऐसी घटनाओं से सीख लेकर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना, बच्चों के व्यवहार को समझना और डिजिटल उपयोग के सही नियम बनाना सभी की जिम्मेदारी है।
बच्चों को केवल मोबाइल से दूर रखने की सलाह देना पर्याप्त नहीं है। उन्हें यह भी सिखाना होगा कि इंटरनेट पर क्या सुरक्षित है, किससे बात करनी चाहिए, परेशानी होने पर किसे बताना चाहिए और दूसरों के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए। इसी तरह स्कूलों को यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी बच्चा परिसर में असुरक्षित या बिना सहायता के न रहे।
बच्चों को डराकर नहीं, समझाकर सुरक्षित बनाइए। उनकी बात सुनिए, उनके मोबाइल उपयोग पर उचित निगरानी रखिए और स्कूल में उनकी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दीजिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
क्या मोबाइल गेम खेलने से बच्चे हिंसक हो जाते हैं?
ऐसा निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता। बच्चों पर डिजिटल सामग्री का प्रभाव अलग-अलग हो सकता है। उम्र, वातावरण, समय, अनुभव और अन्य परिस्थितियों को भी समझना जरूरी है।
क्या छोटे बच्चों को मोबाइल देना चाहिए?
छोटे बच्चों के लिए मोबाइल का उपयोग सीमित, उम्र के अनुरूप और वयस्क की निगरानी में होना चाहिए। पढ़ाई या मनोरंजन के लिए भी सुरक्षित सामग्री चुनना जरूरी है।
स्कूल में बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी होती है?
स्कूल प्रबंधन, प्रधानाचार्य, शिक्षक और संबंधित शिक्षा प्रशासन की अपनी-अपनी जिम्मेदारियाँ होती हैं। अभिभावकों और बच्चों की सहभागिता भी सुरक्षित वातावरण बनाने में महत्वपूर्ण है।
बच्चे को ऑनलाइन परेशान किया जाए तो क्या करें?
बच्चे को भरोसे में लें, संबंधित संदेश या प्रमाण सुरक्षित रखें और स्कूल या अभिभावक को जानकारी दें। गंभीर साइबर अपराध की स्थिति में राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल या पुलिस से संपर्क करें।
बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के सरकारी दिशानिर्देश कहाँ मिलेंगे?
NCPCR की वेबसाइट पर स्कूल सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और बच्चों के सुरक्षित इंटरनेट उपयोग से जुड़े दिशानिर्देश उपलब्ध हैं।
संपादकीय नोट: यह लेख बच्चों की सुरक्षा और डिजिटल जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। पंचकूला की घटना की जाँच जारी है। किसी बच्चे या परिवार की पहचान उजागर करना या अपुष्ट कारणों को तथ्य की तरह प्रस्तुत करना इस लेख का उद्देश्य नहीं है।
लेख: URVINFO | विषय: शिक्षा, बाल सुरक्षा और डिजिटल जागरूकता