H-1B Visa 2026: Indian IT Professionals पर असर:
H-1B Visa New Rules 2026: नई अमेरिकी नीति से भारतीय IT Professionals की Jobs, Salary और अमेरिका में Career पर असर पड़ सकता है।
H-1B Visa New Rules 2026 Indian IT Professionals Jobs Salary
अमेरिका में नौकरी करने का सपना देखने वाले भारतीय IT Professionals के लिए H-1B Visa से जुड़ी नई अमेरिकी नीति बड़ा बदलाव ला सकती है। Trump प्रशासन ने नए H-1B Visa applications पर $103,265 की फीस लगाने का प्रस्ताव दिया है। यह मौजूदा व्यवस्था की तुलना में बेहद बड़ा खर्च है और इसका सीधा असर उन अमेरिकी कंपनियों पर पड़ सकता है जो भारत समेत दूसरे देशों से skilled technology professionals को अमेरिका बुलाती हैं।
हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। $103,265 की फीस अभी proposed regulation है, अंतिम स्थायी नियम नहीं। Reuters के अनुसार अमेरिकी Department of Homeland Security ने इस फीस को स्थायी रूप देने का प्रस्ताव रखा है और इस पर कानूनी चुनौतियां भी चल रही हैं।
इसलिए भारतीय IT Professionals के लिए फिलहाल इसे “H-1B बंद हो गया” या “भारतीयों को अमेरिका में नौकरी नहीं मिलेगी” जैसी खबर के रूप में देखना सही नहीं होगा। असली बदलाव यह है कि US employers के लिए विदेशी skilled worker को H-1B के जरिए hire करना काफी महंगा और अधिक selective हो सकता है।
H-1B Visa क्या है और भारतीयों के लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
H-1B अमेरिका का एक temporary work visa है, जिसके जरिए अमेरिकी कंपनियां specialized occupations में विदेशी professionals को नियुक्त कर सकती हैं। Technology, engineering, research और दूसरे highly skilled क्षेत्रों में इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है।
H-1B की annual statutory cap सामान्य तौर पर 65,000 visas है, जबकि US advanced degree holders के लिए अतिरिक्त 20,000 visas उपलब्ध हैं।
भारतीय professionals इस program के सबसे बड़े beneficiaries में शामिल हैं। Economic Times की जुलाई 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक FY2025 में H-1B approvals में भारतीय professionals की हिस्सेदारी करीब 70% थी और H-1B workers की median annual salary लगभग $133,000 बताई गई थी।
The Economic Times:
यही वजह है कि H-1B में होने वाला कोई भी बड़ा बदलाव भारत के IT professionals और technology companies के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
नई H-1B नीति में सबसे बड़ा बदलाव क्या है? सबसे बड़ी खबर $103,265 proposed fee है।
Reuters के अनुसार Trump administration ने नए H-1B applications के लिए $103,265 fee को स्थायी रूप से लागू करने का प्रस्ताव दिया है। इससे पहले administration ने $100,000 की payment requirement लागू की थी। इस व्यवस्था की legality को लेकर अदालत में चुनौती दी गई है और जून 2026 में एक federal judge ने संबंधित fee initiative को unlawful बताते हुए collection को block किया था। अब DHS इसे regulation के जरिए आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
इसका अर्थ यह नहीं है कि हर भारतीय H-1B employee को अपनी जेब से $103,265 देना होगा। मुख्य आर्थिक बोझ sponsoring employer पर पड़ता है। इसलिए असली सवाल यह है कि क्या अमेरिकी कंपनियां इस अतिरिक्त लागत को स्वीकार करके भारतीय professional को sponsor करना चाहेंगी।
H-1B Visa में क्या-क्या बदल रहा है?
| बदलाव | क्या स्थिति है? | भारतीय IT Professionals पर संभावित असर |
|---|---|---|
| नया H-1B fee proposal | $103,265 proposed fee | Employers के लिए foreign hiring महंगी हो सकती है |
| $100,000 payment requirement | USCIS के अनुसार नई H-1B petitions पर यह requirement लागू की गई थी | नई hiring और sponsorship decisions प्रभावित हो सकते हैं |
| Higher-skilled / higher-paid selection | 27 फरवरी 2026 से नया final rule प्रभावी | High-skill और higher-wage candidates को अपेक्षाकृत फायदा |
| Visa vetting | Screening और scrutiny बढ़ी है | Applicants को documentation और professional profile पर अधिक ध्यान देना होगा |
| H-1B registrations | FY2027 registrations में उल्लेखनीय गिरावट रिपोर्ट हुई | Competition और employer strategy में बदलाव की संभावना |
USCIS ने 2026 H-1B cap season के लिए higher-skilled और higher-paid workers को प्राथमिकता देने वाला नया selection framework लागू किया है। यह rule 27 फरवरी 2026 से effective हुआ।
Reuters के अनुसार technology और consulting companies H-1B program पर काफी निर्भर रही हैं, लेकिन नई लागत और नियमों के कारण कंपनियां अपनी hiring strategies बदल रही हैं।
Salary पर क्या असर पड़ेगा?
यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नई $103,265 fee सीधे भारतीय employee की salary में से काटी जाने वाली राशि नहीं है।
फीस employer-side cost है। लेकिन इसका अप्रत्यक्ष असर salary पर पड़ सकता है।
एक तरफ कंपनियां कम-cost foreign hiring से बच सकती हैं। दूसरी तरफ higher-skilled और higher-paid workers को preference मिलने से skilled professionals के लिए salary threshold और compensation अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है।
USCIS ने 2026 में H-1B selection system में higher-skilled और higher-paid workers को प्राथमिकता देने वाला बदलाव लागू किया है। इसलिए आने वाले समय में सिर्फ degree होना पर्याप्त नहीं हो सकता; high-demand skills और competitive salary profile ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकती है।
क्या भारतीय IT Professionals की US Salary बढ़ सकती है?
कुछ professionals के लिए ऐसा संभव है, लेकिन इसे guaranteed salary hike नहीं माना जा सकता।
यदि employer को H-1B sponsorship पर बहुत अधिक खर्च करना पड़े और selection में higher-paid workers को advantage मिले, तो कंपनियां उन candidates को प्राथमिकता दे सकती हैं जिनकी skills और compensation दोनों मजबूत हैं।
इसका संभावित परिणाम यह हो सकता है:
High-skilled professionals → बेहतर bargaining power
Specialized AI/Cybersecurity/Cloud professionals → ज्यादा demand
Low-cost generic IT roles → ज्यादा pressure
Entry-level foreign applicants → comparatively ज्यादा competition
इसलिए “H-1B fee बढ़ी है तो सभी भारतीयों की salary बढ़ जाएगी” कहना गलत होगा।
भारतीय IT कंपनियों पर क्या असर पड़ेगा?
भारत की बड़ी IT companies लंबे समय से US market में local hiring और global delivery model दोनों का इस्तेमाल करती रही हैं।
Nasscom ने अमेरिकी सरकार से H-1B program के benefits को ध्यान में रखने की अपील की है। Reuters के अनुसार Nasscom का कहना है कि भारतीय technology companies ने पहले ही H-1B workers पर अपनी निर्भरता कम की है और US workforce तथा STEM talent development में निवेश बढ़ाया है।
इसका मतलब है कि Indian IT companies के लिए एक संभावित strategy यह हो सकती है कि:
अमेरिका में local hiring बढ़ाई जाए,
India-based delivery centres का इस्तेमाल बढ़ाया जाए,
employees को short-term relocation के बजाय remote/global teams में रखा जाए,
और केवल highly specialized professionals को H-1B के जरिए US भेजा जाए।
क्या भारतीय IT Professionals के लिए अमेरिका में नौकरी खत्म हो जाएगी? नहीं।
यह कहना फिलहाल गलत और अतिशयोक्ति होगी कि नई policy के कारण भारतीयों के लिए US jobs खत्म हो जाएंगी।
H-1B program अभी भी मौजूद है और US employers skilled foreign workers को hire कर सकते हैं। USCIS की official information के अनुसार H-1B specialty occupations के लिए जारी है।
असल बदलाव यह है कि US employer के लिए H-1B-sponsored worker को hire करना अधिक expensive और potentially more selective हो सकता है।
इसलिए सबसे ज्यादा असर उन jobs पर पड़ने की संभावना है जहां employer को विदेशी worker sponsor करने का पर्याप्त आर्थिक या skill-based फायदा नहीं मिलता।
भारत में IT Jobs पर क्या असर हो सकता है?
यदि US companies H-1B sponsorship कम करती हैं, तो इसका एक दूसरा पक्ष भारत के लिए सकारात्मक भी हो सकता है।
कुछ professionals को US relocation के बजाय India-based roles में काम करने का विकल्प मिल सकता है। भारतीय IT companies भी global projects को India से deliver करने के लिए ज्यादा employees रख सकती हैं।
AI और advanced technology की वजह से भारत में भी skill demand बदल रही है। Economic Times की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार AI, semiconductor, EV और advanced manufacturing से जुड़े क्षेत्रों में engineering और infrastructure skills की मांग बढ़ रही है।
इसलिए H-1B restrictions का long-term effect केवल “भारत से अमेरिका जाने वाली jobs कम होना” नहीं हो सकता। इससे India-based high-skill technology employment को भी बढ़ावा मिल सकता है।
किन भारतीय professionals को सबसे ज्यादा फायदा हो सकता है?
नई व्यवस्था में broadly वे professionals मजबूत स्थिति में हो सकते हैं जिनके पास:
Artificial Intelligence और Machine Learning skills,
Cybersecurity expertise,
Cloud architecture,
Advanced software engineering,
Data engineering,
Robotics,
specialized engineering,
Research और advanced technical degrees
जैसी skills हैं।
इसके पीछे कारण यह है कि US employers के लिए ऐसे specialized workers को hire करने का business case सामान्य IT roles की तुलना में अधिक मजबूत हो सकता है।
किन लोगों के लिए चुनौती बढ़ सकती है?
सबसे ज्यादा pressure इन categories में देखने को मिल सकता है:
Entry-level IT workers
Generic software development roles
ऐसे professionals जिनकी skills US market में आसानी से उपलब्ध हैं
Low-wage H-1B positions
ऐसे candidates जिनके employer के पास sponsorship का मजबूत business justification नहीं है
हालांकि किसी individual applicant का outcome उसके occupation, wage level, employer, qualifications और applicable H-1B rules पर निर्भर करेगा।
H-1B registrations में भी गिरावट:
USCIS के data और हालिया reporting से यह संकेत मिला है कि H-1B registration numbers में बड़ी गिरावट आई है। Reuters ने FY2025 से FY2026 के बीच registration trends में उल्लेखनीय बदलाव की रिपोर्ट की है और FY2025 में लगभग 344,000 entries की तुलना FY2023 में लगभग 759,000 से की है।
यह गिरावट बताती है कि H-1B system में बदलाव केवल visa fee तक सीमित नहीं है। Employer behavior, selection mechanism और immigration scrutiny भी applicant strategy को प्रभावित कर रहे हैं।
भारतीय IT Professionals के लिए इसका क्या मतलब है?
भारत लंबे समय से H-1B कार्यक्रम का सबसे बड़ा लाभार्थी रहा है। खासकर IT, Software Engineering, Data Science, Cloud Computing, Cybersecurity और Artificial Intelligence जैसे क्षेत्रों में बड़ी संख्या में भारतीय professionals अमेरिकी कंपनियों और भारतीय IT कंपनियों के जरिए अमेरिका जाते हैं।
नई व्यवस्था में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि कम वेतन वाली और entry-level positions के लिए प्रतिस्पर्धा कठिन हो सकती है, जबकि ज्यादा skilled और ज्यादा salary वाली positions को अपेक्षाकृत फायदा मिल सकता है।
FY2027 के चयन आंकड़ों में केवल 17.7% selected registrations सबसे निचले OEWS Level 1 wage category में थीं। वहीं selected beneficiaries में 71.5% के पास U.S. advanced degree थी, जबकि FY2026 में यह हिस्सा 57% था।
इसका सीधा संकेत है कि आने वाले समय में केवल degree होना पर्याप्त नहीं होगा। High-demand skills, experience और higher salary वाली jobs ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकती हैं।
$103,265 की प्रस्तावित फीस ने बढ़ाई चिंता
H-1B program में सबसे बड़ा नया विवाद proposed $103,265 fee को लेकर है। अमेरिकी Department of Homeland Security ने नए cap-subject H-1B petitions पर इतनी बड़ी fee लगाने का प्रस्ताव रखा है। यह सामान्य H-1B filing costs की तुलना में बहुत बड़ा बदलाव है और फिलहाल यह regulatory process तथा कानूनी चुनौतियों के अधीन है।
इसका असर खासकर उन कंपनियों पर पड़ सकता है जो विदेश से नए कर्मचारियों को अमेरिका भेजती हैं।
भारतीय IT कंपनियों के लिए इसका अर्थ यह हो सकता है कि किसी employee को भारत से अमेरिका transfer करना पहले की तुलना में काफी महंगा हो जाए। ऐसे में कंपनियां दो रास्ते अपना सकती हैं—या तो अमेरिका में local hiring बढ़ाएं या फिर project का ज्यादा हिस्सा भारत से ही operate करें।
TCS, Infosys, Wipro जैसी कंपनियों पर असर
भारतीय IT services कंपनियां लंबे समय से H-1B का इस्तेमाल अपने कर्मचारियों को U.S. projects पर deploy करने के लिए करती रही हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इन कंपनियों ने अमेरिकी workforce में local hiring और delivery centers पर भी ज्यादा जोर दिया है।
Nasscom के अनुसार भारतीय IT कंपनियां पहले ही अमेरिका में local workforce बढ़ा रही हैं और U.S. STEM talent pipeline में निवेश कर रही हैं। संगठन ने यह भी कहा है कि भारतीय IT industry की H-1B पर निर्भरता पहले की तुलना में कम हुई है।
इसलिए नई policy का असर कंपनियों को पूरी तरह अमेरिका से बाहर करने के बजाय उनके business model को बदलने के रूप में ज्यादा दिखाई दे सकता है।
क्या H-1B अब भारतीयों के लिए बंद हो जाएगा?
ऐसा कहना अभी सही नहीं होगा।
H-1B program अभी भी अमेरिकी technology और professional sectors के लिए महत्वपूर्ण है। FY2027 में USCIS ने annual cap के 85,000 slots के लिए पर्याप्त petitions प्राप्त होने की पुष्टि की थी। इसका मतलब है कि demand कम होने के बावजूद program की जरूरत खत्म नहीं हुई है।
फर्क सिर्फ इतना है कि अब H-1B हासिल करने की रणनीति पहले जैसी नहीं रह सकती।
पहले जहां बड़ी संख्या में registrations के कारण lottery पर काफी निर्भरता थी, वहीं अब salary level, skills, U.S. education और employer की जरूरत ज्यादा महत्वपूर्ण factors बनते जा रहे हैं।
Indian IT Workers को अब क्या करना चाहिए?
भारतीय IT professionals के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वे केवल H-1B visa को career strategy न मानें। उन्हें अपनी skills को इस तरह मजबूत करना होगा कि अमेरिकी employer के लिए उनकी hiring का business value स्पष्ट हो।
विशेष रूप से इन क्षेत्रों में opportunities मजबूत रह सकती हैं:
Artificial Intelligence & Machine Learning: AI engineers, ML engineers और GenAI specialists की मांग।
Cloud Computing: AWS, Azure और Google Cloud जैसी technologies में advanced expertise।
Cybersecurity: Cloud security, application security और threat intelligence जैसे क्षेत्रों में specialization।
Data Engineering: Big Data, analytics infrastructure और data platforms।
Semiconductor & Advanced Technology: Chip design, hardware engineering और emerging technologies से जुड़े roles।
Senior Technology Management: Experienced professionals के लिए architecture, engineering management और technology leadership roles।
Freshers के लिए चुनौती ज्यादा
नई व्यवस्था का सबसे बड़ा असर entry-level candidates पर पड़ सकता है।
अगर कंपनियों को H-1B sponsorship पर ज्यादा खर्च करना पड़ता है और selection में higher-paid positions को प्राथमिकता मिलती है, तो fresh graduates के लिए U.S. में सीधे H-1B-sponsored job पाना कठिन हो सकता है।
ऐसे में भारतीय students और fresh IT professionals के लिए U.S. में higher education, STEM degree, internships और specialized skills महत्वपूर्ण रास्ते बन सकते हैं।
FY2027 के selected beneficiaries में U.S. advanced degree holders की हिस्सेदारी 71.5% तक पहुंचना इसी बदलाव की ओर संकेत करता है।
H-1B Visa से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
H-1B Visa अमेरिका का एक non-immigrant work visa है, जिसके जरिए अमेरिकी कंपनियां highly skilled foreign professionals को specialty occupations में काम करने के लिए नियुक्त कर सकती हैं। IT, Software Engineering, Data Science और Technology जैसे क्षेत्रों में इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है।
FY2027 के लिए properly submitted H-1B registrations करीब 2.11 लाख रहीं, जबकि FY2026 में यह संख्या करीब 3.44 लाख थी। यानी registrations में लगभग 38.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
भारतीय IT Professionals के लिए H-1B Visa हासिल करना पहले की तुलना में अधिक competitive हो सकता है। खासकर entry-level और कम वेतन वाली positions के मुकाबले highly skilled और higher-paid positions को ज्यादा महत्व मिल सकता है।
Highly skilled professionals की salary पर सकारात्मक असर पड़ने की संभावना है। AI, Cloud Computing, Cybersecurity और Data Engineering जैसे क्षेत्रों में experienced professionals को बेहतर salary offers मिल सकते हैं। हालांकि इसका लाभ सभी H-1B applicants को समान रूप से नहीं मिलेगा।
Entry-level candidates के लिए competition बढ़ सकता है। अगर कंपनियों को H-1B sponsorship पर ज्यादा खर्च करना पड़ता है, तो कुछ employers अमेरिका में मौजूद local candidates को प्राथमिकता दे सकते हैं।
अमेरिकी सरकार ने नए H-1B petitions के लिए 103,265 डॉलर की proposed fee का प्रस्ताव रखा है। हालांकि यह प्रस्ताव regulatory और legal review के अधीन है, इसलिए इसे वर्तमान में हर H-1B application पर लागू अंतिम fee नहीं माना जाना चाहिए।
H-1B की लागत और नियमों में बदलाव से भारतीय IT कंपनियां अमेरिका में local hiring बढ़ा सकती हैं और भारत से ज्यादा technology delivery कर सकती हैं। इससे traditional onsite और offshore business model में बदलाव देखने को मिल सकता है।
Artificial Intelligence, Machine Learning, Generative AI, Cloud Computing, Cybersecurity, Data Engineering और Software Architecture जैसी specialized skills भविष्य में महत्वपूर्ण हो सकती हैं।
नहीं। H-1B Visa program बंद नहीं हुआ है। हालांकि selection process, costs और rules में बदलाव के कारण भारतीय professionals के लिए competition और uncertainty बढ़ सकती है।
इसकी संभावना है। अगर कंपनियां अमेरिका में foreign workers को hire करने की बजाय भारत में technology development और delivery बढ़ाती हैं, तो भारत में IT jobs, GCCs और high-skilled technology roles के अवसर बढ़ सकते हैं।
U.S. advanced degree holders को H-1B selection process में विशेष महत्व मिल सकता है। FY2027 के selected beneficiaries में U.S. advanced degree holders की हिस्सेदारी 71.5 प्रतिशत रही।
Professionals को AI, Cloud, Cybersecurity, Data Engineering और advanced software technologies जैसी high-demand skills पर ध्यान देना चाहिए। इसके साथ higher-value और senior-level roles के लिए तैयारी करना भी फायदेमंद हो सकता है।
निष्कर्ष:
H-1B Visa में हो रहे बदलाव भारत के IT Professionals के लिए चुनौती भी हैं और अवसर भी।
एक तरफ registrations में भारी गिरावट, बढ़ती फीस, सख्त scrutiny और बदलती selection प्रक्रिया से अमेरिका में नौकरी पाने का रास्ता कठिन हो सकता है। दूसरी तरफ highly skilled professionals के लिए बेहतर salary और specialized roles के अवसर बढ़ सकते हैं।
भारतीय IT industry के लिए भी यह बदलाव अपने business model को बदलने का अवसर है। अमेरिका में local hiring और भारत में high-value technology work—दोनों का combination आने वाले वर्षों में ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है।
कुल मिलाकर, H-1B का दौर खत्म नहीं हुआ है, लेकिन H-1B के जरिए अमेरिका जाने का तरीका जरूर बदल रहा है।
अब केवल degree और experience पर्याप्त नहीं होंगे। Specialized skills, higher salary, advanced education और employer के लिए वास्तविक value भारतीय IT professionals की सबसे बड़ी ताकत बन सकती है।
