शारदीय नवरात्रि 2026 के अवसर पर देश के अलग-अलग राज्यों में माँ दुर्गा की आराधना, विशाल प्रतिमाओं, आकर्षक पूजा पंडालों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की तैयारियाँ चर्चा में हैं। मध्य प्रदेश के जबलपुर में 81 फीट तक की देवी प्रतिमाओं वाला आयोजन, पश्चिम बंगाल के कोलकाता में ईडन गार्डन्स का भव्य दुर्गोत्सव कार्यक्रम, उत्तर प्रदेश के वाराणसी में 30 फीट की प्रतिमा और ओडिशा के भुवनेश्वर में झारपड़ा का मंदिर-थीम वाला पंडाल इस बार के खास आकर्षणों में शामिल हैं।
इस लेख में जानिए इन चार स्थानों पर क्या खास है, आयोजन कहाँ हो रहा है और श्रद्धालुओं को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। प्रतिमाओं की ऊँचाई और पंडालों की विशेषताओं के आँकड़े प्रकाशित समाचार रिपोर्टों और आयोजकों की जानकारी पर आधारित हैं। इन्हें पूरे भारत का प्रमाणित सबसे बड़ा आयोजन या राष्ट्रीय रिकॉर्ड नहीं माना जाना चाहिए।
- जबलपुर, मध्य प्रदेश: 31 देवी प्रतिमाएँ, ऊँचाई 5 से लगभग 81 फीट तक बताई गई।
- कोलकाता, पश्चिम बंगाल: ईडन गार्डन्स में 10 अक्टूबर को ‘उमा आगमनी’ कार्यक्रम, ढाक वादन और ड्रोन शो।
- वाराणसी, उत्तर प्रदेश: सनातन धर्म इंटर कॉलेज में 30 फीट की माँ दुर्गा की प्रतिमा प्रस्तावित।
- भुवनेश्वर, ओडिशा: झारपड़ा में मंदिर-थीम वाला भव्य पंडाल और सांस्कृतिक कार्यक्रम।
1. जबलपुर, मध्य प्रदेश: एक परिसर में माँ के 31 स्वरूप
मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में चरगवां के पास स्थित सूखा (भरतपुर) गाँव में 11 से 22 अक्टूबर 2026 तक 12 दिवसीय नवरात्रि महोत्सव आयोजित किए जाने की जानकारी प्रकाशित हुई है। सार्वजनिक दुर्गा उत्सव समिति के इस आयोजन में दश महाविद्या, नवदुर्गा, महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती सहित देवी के विभिन्न स्वरूपों के दर्शन का अवसर मिलेगा।
क्या होगा खास?
- आयोजन के लिए लगभग पाँच एकड़ भूमि निर्धारित किए जाने की रिपोर्ट है।
- 31 देवी प्रतिमाओं की ऊँचाई लगभग 5 फीट से 81 फीट तक बताई गई है।
- कलश शोभायात्रा, विशेष पूजा, शतचंडी महायज्ञ, धार्मिक प्रवचन और सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।
- रिपोर्ट के अनुसार आयोजन का समापन 22 अक्टूबर को दशहरा कार्यक्रम के साथ होगा।
कहाँ जाएँ? सूखा (भरतपुर) गाँव, चरगवां क्षेत्र, जिला जबलपुर, मध्य प्रदेश। यात्रा से पहले आयोजन समिति से सटीक मार्ग, पार्किंग और दर्शन के समय की पुष्टि कर लें।
स्रोत: विस्तार न्यूज़ की रिपोर्ट | फ्री प्रेस जर्नल
2. कोलकाता, पश्चिम बंगाल: ईडन गार्डन्स का ‘उमा आगमनी’ आयोजन
पश्चिम बंगाल की दुर्गा पूजा देश ही नहीं, दुनिया भर में अपनी कलात्मकता और सांस्कृतिक भव्यता के लिए प्रसिद्ध है। इस वर्ष 10 अक्टूबर 2026 को महालया के अवसर पर कोलकाता के ईडन गार्डन्स में राज्य सरकार के ‘उमा आगमनी’ कार्यक्रम के जरिए दुर्गा पूजा उत्सव का औपचारिक शुभारंभ किया गया।
कार्यक्रम की प्रमुख बातें
- कार्यक्रम में लगभग 3,000 पारंपरिक ढाक वादकों के एक साथ प्रदर्शन की खबर प्रकाशित हुई।
- आसमान में ड्रोन के माध्यम से माँ दुर्गा के महिषासुरमर्दिनी स्वरूप की आकृति दिखाई गई।
- संगीत, नृत्य, आतिशबाजी और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ भी कार्यक्रम का हिस्सा रहीं।
- न्यूज़ ऑन AIR की रिपोर्ट के अनुसार, ढाक वादकों के सामूहिक प्रदर्शन को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में स्थान मिला।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि ईडन गार्डन्स का 10 अक्टूबर वाला कार्यक्रम दुर्गा पूजा उत्सव का शुभारंभ था। बंगाल की मुख्य पूजा के दिन इसके बाद आते हैं। इसलिए इस आयोजन को उसी दिन सभी पूजा पंडालों में प्रतिमा स्थापना पूरी होने का प्रमाण नहीं समझना चाहिए।
कहाँ जाएँ? ईडन गार्डन्स, कोलकाता, पश्चिम बंगाल। कार्यक्रम विशेष या प्रवेश-नियंत्रित हो सकता है; वहाँ जाने से पहले सार्वजनिक प्रवेश, यातायात और स्थानीय निर्देशों की जानकारी लें।
स्रोत: न्यूज़ ऑन AIR की रिपोर्ट
3. वाराणसी, उत्तर प्रदेश: 30 फीट की माँ दुर्गा और मंदिर-थीम वाले पंडाल
उत्तर प्रदेश के वाराणसी में भी दुर्गा पूजा को लेकर भव्य तैयारियों की खबरें हैं। नई सड़क स्थित सनातन धर्म इंटर कॉलेज में माँ दुर्गा की 30 फीट ऊँची और लगभग 15 फीट चौड़ी प्रतिमा स्थापित किए जाने की जानकारी प्रकाशित हुई है। आयोजकों ने इसे उत्तर प्रदेश की सबसे ऊँची प्रतिमाओं में से एक बताया है; यह दावा आयोजकों का है, स्वतंत्र राष्ट्रीय रिकॉर्ड नहीं।
काशी के पंडालों में क्या खास है?
- सनातन धर्म इंटर कॉलेज में बद्रीनाथ धाम की तर्ज पर लगभग 60 फीट ऊँचा पंडाल बनाने की जानकारी है।
- हथुआ मार्केट के एक पंडाल में कंबोडिया के अंगकोरवाट मंदिर से प्रेरित वास्तुशैली दिखाई जाएगी।
- शिवपुर मिनी स्टेडियम में केदारनाथ मंदिर की तर्ज पर पंडाल बनाने की खबर है।
- कुछ स्थानों पर इलेक्ट्रॉनिक शो और पर्यावरण को ध्यान में रखकर प्रतिमाएँ तैयार करने की योजना बताई गई है।
- वाराणसी में सैकड़ों सार्वजनिक स्थानों पर प्रतिमा स्थापना की तैयारी की रिपोर्ट प्रकाशित हुई है।
यहाँ धार्मिक परंपरा के साथ शिल्पकला, मंदिर स्थापत्य और आधुनिक तकनीक का मेल देखने को मिल सकता है। भीड़ वाले स्थानों पर जाने से पहले यातायात और पार्किंग संबंधी स्थानीय निर्देशों को देखना उपयोगी होगा।
कहाँ जाएँ? नई सड़क स्थित सनातन धर्म इंटर कॉलेज, हथुआ मार्केट और वाराणसी के अन्य प्रमुख पूजा पंडाल। यात्रा से पहले संबंधित समिति से दर्शन का समय और पंडाल खुलने की पुष्टि करें।
स्रोत: अमर उजाला की रिपोर्ट
4. भुवनेश्वर, ओडिशा: झारपड़ा का मंदिर-थीम वाला भव्य पंडाल
ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में झारपड़ा दुर्गा पूजा समिति का आयोजन भी खास आकर्षण है। 2026 के लिए प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, झारपड़ा मेला ग्राउंड में जगतजननी मंदिर की शैली से प्रेरित पंडाल तैयार किया जा रहा है। इसमें सजावटी कारीगरी, रोशनी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को प्रमुखता दी गई है।
इस आयोजन की विशेषताएँ
- रिपोर्ट के अनुसार पंडाल लगभग 100 फीट ऊँचा और 130 फीट चौड़ा बनाया जा रहा है।
- पूजा स्थल लगभग 4.5 एकड़ क्षेत्र में फैला बताया गया है।
- सुनहरी फिलिग्री शैली की सजावट, LED रोशनी और सात सजावटी प्रवेश द्वार प्रस्तावित हैं।
- पारंपरिक पूजा के साथ संगीत, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और सामुदायिक भोग की व्यवस्था की योजना है।
- भीड़ प्रबंधन, स्वयंसेवकों और CCTV की व्यवस्था का भी विवरण प्रकाशित हुआ है।
कहाँ जाएँ? झारपड़ा मेला ग्राउंड, भुवनेश्वर, ओडिशा। भीड़ अधिक होने की संभावना के कारण स्थानीय यातायात, पार्किंग और प्रवेश मार्ग की जानकारी लेकर निकलें।
स्रोत: प्रमेय न्यूज़ की रिपोर्ट | ओडिशा पोस्ट की रिपोर्ट
इन चार जगहों में क्या अंतर है?
| स्थान | मुख्य आकर्षण | रिपोर्ट में बताया गया आकार |
|---|---|---|
| जबलपुर, मध्य प्रदेश | 31 देवी स्वरूप और धार्मिक अनुष्ठान | प्रतिमाएँ लगभग 5–81 फीट |
| कोलकाता, पश्चिम बंगाल | उमा आगमनी, ढाक वादन और ड्रोन शो | लगभग 3,000 ढाक वादकों की भागीदारी की रिपोर्ट |
| वाराणसी, उत्तर प्रदेश | विशाल प्रतिमा और मंदिर-थीम वाले पंडाल | प्रतिमा 30 फीट; एक पंडाल लगभग 60 फीट |
| भुवनेश्वर, ओडिशा | जगतजननी मंदिर-थीम और सजावटी रोशनी | पंडाल लगभग 100 फीट ऊँचा |
नोट: ऊपर दिए गए आकार और संख्या मीडिया रिपोर्टों/आयोजकों की जानकारी पर आधारित हैं। अलग-अलग प्रकार की प्रतिमाओं और पंडालों की ऊँचाई की सीधी तुलना करके किसी एक को पूरे भारत में सबसे बड़ा घोषित नहीं किया जा सकता।
दर्शन या यात्रा पर जाने से पहले ध्यान रखें
- पंडाल खुलने का समय, पूजा कार्यक्रम और प्रवेश व्यवस्था स्थानीय आयोजक से जाँच लें।
- भीड़ वाले क्षेत्रों में वाहन पार्किंग और यातायात के आधिकारिक निर्देशों का पालन करें।
- बच्चों और बुजुर्गों के साथ जा रहे हैं तो मिलने की जगह पहले तय कर लें।
- धार्मिक स्थलों पर साफ-सफाई बनाए रखें और प्लास्टिक या कचरा न फैलाएँ।
- फोटो या वीडियो लेने के लिए स्थानीय नियमों का पालन करें और श्रद्धालुओं की निजता का सम्मान करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
जबलपुर में 81 फीट तक की प्रतिमाएँ कहाँ स्थापित की जा रही हैं?
प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार जबलपुर जिले के चरगवां के पास सूखा (भरतपुर) गाँव में 31 देवी प्रतिमाओं वाला नवरात्रि आयोजन प्रस्तावित है।
कोलकाता के ईडन गार्डन्स में क्या खास हुआ?
10 अक्टूबर 2026 को ‘उमा आगमनी’ कार्यक्रम में ढाक वादन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ, ड्रोन शो और आतिशबाजी हुई।
वाराणसी में 30 फीट की माँ दुर्गा की प्रतिमा कहाँ होगी?
रिपोर्ट के अनुसार नई सड़क स्थित सनातन धर्म इंटर कॉलेज में 30 फीट ऊँची प्रतिमा स्थापित किए जाने की योजना है। आयोजन की वर्तमान स्थिति स्थानीय समिति से जाँचें।
भुवनेश्वर के झारपड़ा पंडाल की क्या खासियत है?
2026 की रिपोर्टों के अनुसार यहाँ जगतजननी मंदिर की शैली से प्रेरित लगभग 100 फीट ऊँचा पंडाल, सजावटी रोशनी और सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।
क्या इनमें से कोई पंडाल पूरे भारत में सबसे बड़ा प्रमाणित है?
उपलब्ध जानकारी से पूरे भारत के सबसे बड़े पंडाल या सबसे ऊँची प्रतिमा का प्रमाणित राष्ट्रीय रिकॉर्ड तय नहीं किया जा सकता। लेख में दिए गए आकार संबंधित रिपोर्टों और आयोजकों के दावों पर आधारित हैं।
निष्कर्ष
नवरात्रि और दुर्गा पूजा भारत की धार्मिक आस्था, कला, लोक-संस्कृति और सामुदायिक सहभागिता का सुंदर संगम हैं। जबलपुर में देवी के अनेक स्वरूपों का आयोजन, कोलकाता में ढाक और ड्रोन से सजा उत्सव, वाराणसी के मंदिर-थीम वाले पंडाल और भुवनेश्वर की सजावटी कारीगरी इस विविधता की झलक देते हैं। यात्रा करने से पहले आयोजन की तारीख, प्रवेश और स्थानीय व्यवस्था की पुष्टि करें तथा धार्मिक आयोजनों की गरिमा और स्वच्छता बनाए रखें।
संपादकीय नोट: यह लेख 11 अक्टूबर 2026 तक प्रकाशित मीडिया रिपोर्टों के आधार पर तैयार किया गया है। कार्यक्रमों में बदलाव संभव है। प्रतिमाओं और पंडालों की ऊँचाई संबंधित रिपोर्टों/आयोजकों के विवरण के अनुसार दी गई है। तस्वीरों के स्रोत उनके कैप्शन में दिए गए हैं; प्रकाशन से पहले प्रत्येक तस्वीर के उपयोग की अनुमति और लाइसेंस की जाँच करें।
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