₹3,000 के मॉडल से जापान तक पहुंची पूजा पाल, गांव की बेटी ने अपनी सोच से बदली पहचान:

Pooja Pal dust free thresher innovation

बाराबंकी की छात्रा पूजा पाल अपने धूल रहित थ्रेशर मॉडल के साथ, जिसने उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई।

बाराबंकी की पूजा पाल ने गेहूं की थ्रेशिंग के दौरान उड़ने वाली धूल की समस्या को समझकर कम लागत वाला धूल रहित थ्रेशर मॉडल तैयार किया।

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के एक छोटे से गांव की रहने वाली पूजा पाल की कहानी इस बात की मिसाल है कि बड़ा बदलाव लाने के लिए हमेशा बड़े संसाधनों की जरूरत नहीं होती। एक सामान्य समस्या को देखकर सवाल पूछना और उसका समाधान खोजने की कोशिश ही उनकी पहचान बन गई।

 

पूजा ने गेहूं की थ्रेशिंग के दौरान उड़ने वाली धूल को देखा। इस धूल से आसपास के लोगों और बच्चों को परेशानी होती थी। कक्षा 8 में पढ़ते समय उनके मन में विचार आया कि क्या इस धूल को कम किया जा सकता है। इसी सवाल से उनके innovation की शुरुआत हुई।

समस्या को देखकर शुरू हुआ समाधान का सफर:

पूजा ने अपने विज्ञान शिक्षक राजीव श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में इस विचार पर काम करना शुरू किया। कई प्रयासों के बाद उन्होंने टीन और पंखे जैसी साधारण चीजों की मदद से एक ऐसा मॉडल तैयार किया, जिसका उद्देश्य थ्रेशिंग के दौरान उड़ने वाली धूल और भूसे को अलग करके उसके फैलाव को कम करना था।

 

इस मॉडल को तैयार करने में लगभग ₹3,000 खर्च हुए। उनके परिवार के लिए यह रकम भी महत्वपूर्ण थी, लेकिन पूजा ने अपने विचार पर काम करना जारी रखा।

छोटे मॉडल से राष्ट्रीय पहचान तक:

पूजा के innovation को आगे बढ़ने का अवसर मिला। उनका मॉडल विभिन्न स्तरों की विज्ञान प्रदर्शनियों तक पहुंचा और बाद में INSPIRE Award से जुड़ी राष्ट्रीय पहचान हासिल हुई।

 

उनकी मेहनत का दायरा केवल भारत तक सीमित नहीं रहा। वर्ष 2025 में उन्हें Sakura Science High School Programme के तहत जापान जाने का अवसर मिला, जहां उन्होंने अपने innovation को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत किया।

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मान:

पूजा की उपलब्धि को राष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मान मिला। दिसंबर 2025 में उन्हें *प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार* से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में उन्हें यह सम्मान प्रदान किया।

 

उनका innovation कृषि क्षेत्र में थ्रेशिंग के दौरान फैलने वाली धूल को कम करने की दिशा में एक प्रयास है। यही वजह है कि उनकी कहानी विज्ञान, innovation और सामाजिक जिम्मेदारी का उदाहरण बन गई है।

पूजा पाल की कहानी हमें क्या सिखाती है?

पूजा की कहानी का सबसे बड़ा संदेश यह है कि किसी समस्या को देखकर केवल शिकायत करने के बजाय उसके समाधान के बारे में सोचना चाहिए।

 

एक गांव की छात्रा ने अपने आसपास की समस्या को देखा, सवाल किया, प्रयोग किया, असफलताओं के बावजूद प्रयास जारी रखा और अंततः राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय पहचान हासिल की।

 

उनकी यात्रा यह भी दिखाती है कि *प्रतिभा केवल बड़े शहरों या महंगे संसाधनों तक सीमित नहीं होती।* सही सोच, मेहनत और मार्गदर्शन मिलने पर छोटे गांवों से भी बड़े बदलाव की शुरुआत हो सकती है।

पूजा पाल की उपलब्धियां:

उपलब्धि जानकारी
नाम पूजा पाल
स्थान बाराबंकी, उत्तर प्रदेश
Innovation धूल रहित थ्रेशर / भूसा-धूल पृथक्करण मॉडल
मॉडल की लागत लगभग ₹3,000
अंतरराष्ट्रीय अवसर जापान, Sakura Science High School Programme
राष्ट्रीय सम्मान प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार

FAQ?

पूजा पाल कौन हैं?

पूजा पाल उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले की छात्रा और युवा innovator हैं, जिन्होंने गेहूं की थ्रेशिंग के दौरान उड़ने वाली धूल को कम करने के उद्देश्य से एक मॉडल तैयार किया।

पूजा पाल ने क्या बनाया?

उन्होंने धूल रहित थ्रेशर का एक मॉडल तैयार किया, जिसका उद्देश्य थ्रेशिंग के दौरान उड़ने वाली धूल को कम करना है।

पूजा पाल के मॉडल की लागत कितनी थी?

रिपोर्टों के अनुसार मॉडल तैयार करने में लगभग ₹3,000 खर्च हुए थे।

निष्कर्ष:

पूजा पाल की कहानी केवल एक पुरस्कार जीतने की कहानी नहीं है। यह उस सोच की कहानी है जिसमें एक छोटी-सी समस्या को देखकर समाधान खोजने का प्रयास किया गया।

बाराबंकी की इस बेटी ने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने innovation के जरिए यह संदेश दिया कि अगर सोच बड़ी हो और प्रयास लगातार जारी रहे, तो गांव से शुरू हुआ एक छोटा विचार भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान हासिल कर सकता है।

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